हिन्दू धर्म में क्यों करते हैं ये 12 कार्य,छिपा हैं गूढ़ रहस्य

आज के लेख में हम आप को हिन्दू धर्म के 12 कार्यों के बारे में बताएंगे जो की हिन्दू धर्म में किये जाते हैं. लेकिन हम आप को इन कार्यों को बताने के साथ – साथ यह भी बताएंगे की आखिर हिन्दू धर्म में इन 12 कार्यों के करने के पीछे कौन सा वैज्ञानिक और गूढ़ रहस्य छिपा हैं.

जी हाँ दोस्तों हम आप को बताएँगे की इनके पीछे की वजह क्या हैं और सही कहें तो यह उनके लिए गूढ़ रहस्य भी हो सकता हैं जो इस के बारे में नही जानते हैं लेकिन वहीँ जो लोग जानते हैं उनके लिए यह बातें एकदम आम हो.

हिन्दू धर्म में क्यों करते हैं ये 12 कार्य,छिपा हैं गूढ़ रहस्य

लेकिन इस लेख का अंत में सार आप को यही मिलेगा की आप भी कहें की हाँ आज हमें कुछ पढने और सीखने को मिला हैं. तो चलिए शुरू करते हैं और बताते हैं आप को वो 12 कार्य जो हिन्दू धर्म में आम तौर पर किये जाते हैं.

स्वास्तिक का चिन्ह

स्वास्तिक का चिन्ह हिन्दू धर्म में बहुत ही शुभ माना जाता हैं. चाहे कोई घर बनाये या किसी की शादी हो, किसी बच्चे का नामकरण हो या जन्मदिवस हो, घर में कोई कथा करवानी हो या कोई हवन पूजन हो, हम कोई भी नयी वस्तु घर खरीद कर लायें या कोई भी जमीन-जायदाद , मकान , प्लाट आदि हो या फिर किसी भी नए काम को करने की शुरुआत करनी हो.

हिन्दू धर्म में सभी कार्यों में स्वास्तिक का चिन्ह अपने आप में बहुत शुभ स्थान रखता हैं और इसे शुभ का प्रतीक माना जाता हैं. लेकिन आप ने सोचा हैं की इसे सभी जगहों पर सबसे पहले क्यो प्रयोग में लाया जाता हैं. स्वास्तिक का चिन्ह मंगल का प्रतीक माना जाता हैं.

कोई भी मंगल कार्य जिसे की मांगलिक यानि शुभ कार्य कहा जाता हैं वहां इसे इस्तेमाल अवश्य किया जाता हैं. इसके बिना कोई भी शुभ कार्य संभव नहीं हैं. स्वास्तिक शब्द को ‘सु‘ और ‘अस्ति‘ का मिश्रण योग माना गया हैं. ‘सु’ का अर्थ होता हैं ‘शुभ‘ और ‘अस्ति’ का अर्थ होता हैं ‘होना‘.

इस तरह से सु और अस्ति भले ही दो अलग शब्द हो लेकिन जब हम इन्हें एक करते हैं तो यह ‘स्वास्तिक‘ बन जाता हैं. सु और अस्ति का सन्देश और अर्थ हैं ‘शुभ होना‘. इस तरह से स्वास्तिक का मौलिक अर्थ हैं ‘शुभ हो‘ , ‘कल्याण हो‘.

चरण स्पर्श करना (पैर छूना)

हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार जब भी हम अपने से किसी बड़े व्यक्ति से मिलते हैं फिर चाहें वो स्त्री हो या पुरुष हम उनके पैर स्पर्श करते हैं यानि चरण छूते हैं. जब भी हम किसी के पैर छूते हैं तो हमारे मस्तिष्क से निकलने वाली ऊर्जा हमारें हाथों और सामने वाले व्यक्ति के पैरों से होते हुए एक चक्र को पूरा करती हैं.

पैरो को स्पर्श करने की प्रक्रिया में ऊर्जा का एक चक्र पूरा होता हैं. इसे कॉस्मिक एनर्जी का प्रवाह कहते हैं. हमारे ऐसा करने से सामने वाले व्यक्ति की सकारात्मक ऊर्जा हमे प्राप्त होती हैं. इसे ही हिन्दू धर्म में बड़ों का आशीर्वाद माना जाता हैं. इसी कारण से हम अपने से बड़ों के पैर छूते हैं.

पैर या चरण छूनें से अपने से बड़े व्यक्ति को मान-सम्मान प्राप्त होता हैं तो हमे भी उनसे आशीर्वाद स्वरूप सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती हैं, जो भविष्य में हमारे ही काम आती हैं. तो चरण छूनें के पीछें यह सबसे बड़ा वैज्ञानिक कारण हैं.

व्रत या उपवास रखना

हिन्दू धर्म में कोई भी धार्मिक त्यौहार हो तो लोग व्रत रखते हैं. जैसे की जन्माष्टमी , नवरात्र-व्रत, शिवरात्रि , महाशिवरात्रि, एकादशी, करवा चौथ,अहोई अष्टमी, भैया दौज और रक्षा बंधन आदि. सामान्य रूप से भी घर में कोई धार्मिक आयोजन होने पर लोग व्रत और उपवास रखते हैं.

आयुर्वेद के अनुसार व्रत या उपवास रखने से मनुष्य की पाचन क्रिया अच्छी होती हैं और पाचन शक्ति बढती हैं. साथ ही व्रत में फलाहार लेने के पीछे कारण यह हैं की इन्हें लेने से शरीर डी-टोक्स (Detox) होता हैं. जिसके कारण हमारे शरीर में मौजूद हानिकारक तत्व बाहर आ जाते हैं या वो मर जाते हैं.

शोधकर्ताओं के अनुसार जो व्यक्ति व्रत रखता हैं उसे कैंसर का खतरा कम हो जाता हैं. दिल यानी हृदय से जुड़े रोग और बीमारी भी ऐसे व्यक्ति को नहीं लगते हैं. मधुमेह और डायबिटीज भी व्रत करने वाले व्यक्ति को आसानी से नहीं होते हैं.

तुलसी माता का पौधा

तुलसी का पौधा हिन्दू धर्म में हर किसी के घर में होता हैं. जिस घर में तुलसी का पौधा होता हैं, वहां पर हमेशा सुख और शांति बनी रहती हैं. जिस घर में तुलसी होती हैं वहां अगर कोई व्यक्ति गलत चरित्र और गलत कार्यों को करता हैं तो उस घर की तुलसी सुऊख जाती हैं और वहां से चली जाती हैं.

तुलसी माता को लक्ष्मी जी का ही दूसरा रूप माना गया हैं. जिस घर में तुलसी का पौधा रहता हैं वहां पर शांति , खुशहाली , विभव और धन-धान्य की हमेशा ही वृद्धि होती हैं. जिस घर में तुलसी का पौधा हैं वहां यह समझना चाहिए की उस घर में देवी लक्ष्मी जी भी निवास करती हैं.

तुलसी माता के पौधे में काफी सारे औषधियों के गुण भी विधमान हैं और तुलसी के बीज और इसकी पत्तियों को आयुर्वेदिक दवाओं को बनाने के समय इस्तेमाल किया जाता हैं. आम तौर पर हर एक आयुर्वेदिक दवाई में तुलसी होती हैं तभी कोई भी दवाई बन पाती हैं.

108 का चक्र और माला में 108 मोती ही क्यों ?

आप ने कभी सोचा हैं की माला में 108 मोती ही क्यों होते हैं. हिन्दू धर्म में 108 अंक को बहुत ही शुभ माना गया हैं. इसके पीछे बहुत सारी मान्यता और विश्वास जुड़ें हुए हैं. सौर मंडल में सूर्य सबसे शक्तिशाली और रोशनी देने वाला ग्रह हैं. सूर्य देव को उच्च देवताओं की श्रेणी में गिना जाता हैं.

सूर्य देव को प्रसन्न करके व्यक्ति , धन , दौलत , यश , सम्मान , सौभाग्य , संतान आदि सब कुछ पा सकता हैं और 108 अंक भी सूर्य से जुड़ा हुआ हैं. मन्त्रों के जाप की बात करें तो यह सूर्य की कलाओं से सीधे तौर पर जुडी हुई हैं. एक वर्ष में सूर्य 2,16,000 कलाएं बदलता हैं.

इस तरह से छः महीने में सूर्य 1,08,000 कलाएं बदलता हैं. इस संख्या में से पीछे के तीन शून्य को हटाकर आगे के तीन अंकों 108 को लिया गया हैं. ज्योतिष में माला के प्रत्येक मोती को सूर्य की एक कला के जितना शक्तिशाली माना हैं तभी इसे 108 से और मोतियों और माला को आपस में जोड़ा गया हैं.

इसी तरह से माला और उसके मोतियों की संख्या 108 हैं, गृह और राशि से भी जुडी हुई हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राशियों की संख्या 12 होती हैं. प्रत्येक राशि का सम्बन्ध सौर मंडल में उपस्थित ग्रहों से होता हैं. यानी 12 राशियों और 9 ग्रहों का आपस में सम्बन्ध हैं. 12 को 9 से गुना देने के बाद भी संख्या 108 ही निकलकर आती हैं.

इसी तरह से हिन्दू धर्म में ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 27 नक्षत्र होते हैं और उनकी गुना अगर हम चार से करते हैं तो भी संख्या निकलकर 108 ही आती हैं. इस तरह से देखा जाएँ तो यह सभी राशि , ग्रहों और नक्षत्रों को अपने पक्ष में लाने में भी सिद्ध होता हैं. यही कारण हैं की माला में मोतियों की संख्या 108 होती हैं.

जमीन पर बैठकर भोजन करना

हिन्दू धर्म में लोग जमीन पर बैठकर भोजन करते हैं. इसके पीछे यह तर्क हैं की पालथी मारकर बैठना भी एक प्रकार का योगासन हैं. इस अवस्था और पोजीशन में बैठने से व्यक्ति का मष्तिष्क शांत रहता हैं.

भोजन करते समय मनुष्य का दिमाग शांत हो तो पाचन क्रिया भी सही रहती हैं और भोजन भी आसानी से और जल्दी पच जाता हैं. इस अवस्था में कोई भी व्यक्ति बैठता हैं तो दिमाग को स्वयं ही एक सन्देश जाता हैं की शरीर और दिमाग अब आराम में हैं और कोई काम नहीं कर रहे हैं.

इसके बाद दिमाग से पेट को एक तरंग या सन्देश जाता हैं की वह अब खाना या भोजन करने के लिए तैयार हो जाएँ. तो आप समझ गए होंगे की आखिर जमीन पर बैठकर खाना या भोजन क्यों किया जाता हैं.

कानों का छेदन करवाना

हिन्दू धर्म में कर्ण छेदन को एक संस्कार माना जाता हैं. आप ने देखा होगा की बहुत से लोग कान में बाली या कोई अन्य प्रकार की धातु से बनी कोई चीज़ धारण करते हैं. इससे हमारे शरीर का रक्त चाप भी नियंत्रण में रहता हैं.

दर्शन शास्त्री ऐसा भी मानते हैं की इससे सोचने की शक्ति भी बढती हैं. डॉक्टर्स का मानना हैं की इससे हमारी बोली का प्रवाह अच्छा होता हैं और भाषा – शैली अच्छी होती हैं. साथ ही कानों से होकर दिमाग तक जाने वाली नसों का रक्त संचार भी नियंत्रित रहता हैं.

सिर पर चोटी रखने की परंपरा

हिन्दू धर्म में ऋषि और मुनि सिर पर चुटिया रखा करते थे. आज के समय में बहुत सारे लोग सिर पर चुटिया रखते हैं. जिस जगह पर चुटिया छोड़ी जाती हैं, उस जगह पर हमारे दिमाग की सारी नसें एक साथ आकर मिलती हैं.

चुटिया रखने से हमारा दिमाग एकदम स्थिर रहता हैं और इंसान को क्रोध भी नही आता हैं और वह शांत-चित्त रहता हैं. चुटिया रखने से मनुष्य के सोचने की शक्ति भी बढती हैं और वह बुद्धिमान बनता हैं.

सूर्य नमस्कार करना

हिन्दू धर्म में सुबह के समय व्यक्ति नहा धोकर पूजा करता हैं और सूर्य देव को जल अर्पित करता हैं. सुबह के समय सूर्य देव को सूर्य नमस्कार करने की भी परम्परा हैं. सूर्य से जुड़े बहुत सारे योग भी हैं जो की सुबह के समय सूर्य निकलते समय ही किये जाते हैं.

सूर्य नमस्कार करते समय जल देते समय उसके बीच से आने वाली सूर्य की किरणें आँखों की रोशनी और शक्ति को बढा देती हैं. शुभ के समय सूर्य नमस्कार करने से हमें और हमारे शरीर को विटामिन्स भी मिलते हैं. सूर्य नमस्कार करते – करते ही हमें यह अपने आप मिल जाती हैं.

माथे पर कुमकुम तिलक लगाना

मनुष्य की आँखों के बीच में से माथे तक एक नस जाती हैं. इस जगह पर कुमकुम या तिलक लगाने से इस जगह की उर्जा यही संरक्षित रहती हैं. अगर आप यहाँ तिलक लगायेंगे तो आप की याददाश्त बनी रहेगी और आप को भूलने की बीमारी नहीं होगी.

माथे पर तिलक लगाते समय जब अंगूठे या ऊँगली से दबाव पड़ता हैं तो मनुष्य के चेहरे की त्वचा को रक्त सप्लाई करने वाली मांसपेशियां सक्रिय हो जाती हैं. ऐसा करने से चेहरें की कोशिकाओं तक अच्छी तरह रक्त पहुँचता हैं और चेहरें पर दूसरें मनुष्यों की तुलना में ज्यादा तेज रहता हैं.

पीपल की पूजा

पीपल एक अकेला ऐसा पेड़ हैं जो रात्रि में भी ऑक्सीजन प्रवाहित करता हैं. स्कंदपुराण में तो पीपल के पेड़ के बारे में लिखा भी गया हैं की इसकी अपनी एक विशेषता हैं और इसके धार्मिक महत्व का उल्लेख भी उसमे मिलता हैं. पीपल के मूल में भगवान विष्णु , तने में केशव , शाखाओं में नारायण , पत्तों में हरि और फलों में सभी देवताओं का वास माना जाता हैं.

पीपल के पेड़ को श्रद्धा से प्रणाम और नमस्कार करने से ही मनुष्य के दुःख – दर्द शीघ्र ही मिट जाते हैं. सुबह के समय पीपल को नमस्कार करने से सभी देवता आप से प्रसन्न रहते हैं. पीपल के पेड़ में सभी देवताओं का निवास माना जाता हैं.

हाथ जोडकर नमस्ते करना

जब भी हम किसी से मिलते हैं तो उस से हाथ जोडकर नमस्ते या नमस्कार करते हैं. जिस समय सभी उँगलियाँ आपस में एक साथ मिलती हैं और सभी उँगलियों के शीर्ष एक साथ टकराते हैं तो उन पर दबाव पड़ता हैं.

इस तरह से एक्यूप्रेशर के दबाव के कारण इसका सीधा असर हमारी आँखों , कानों और दिमाग पर होता हैं. ऐसा करने से सामने वाले व्यक्ति को हम लम्बे समय तक याद रख सकते हैं.

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